इन लोगों को दुनिया सझता था निकम्मा, आज रच दिया इतिहास

अगर आप किसी कंप्टीशन की तैयार कर रहे हैं तो आपको ऐसे लोगों से कुछ सीखना चाहिए जिन्हें स्कूल-कॉलेज व बिजनेस के दिनों में बहुत होशियार या यूं कहें के हुनरमंद इंसान नहीं माना गया। किसी ने इनकी एजुकेशन को देखकर अंदाजा नहीं लगाया था कि आगे चलकर जीवन में नई इबारत लिखेंगे। कोई स्कूल के दिनों में फिसड्डी छात्र रहा तो किसी का कॉलेज के दिनों में मन नहीं लगा, लेकिन इन्होंने जीवन में जो कुछ किया वो हर किसी के लिए प्रेरणादायक है, जिनसे हर किसी को सीखना चाहिए। ऐसे लोग आपको जीवन में आगे बढ़ने में ऊर्जा दे सकते हैं। भले ही आप जीवन में लगातार असफल हो रहे हैं या फिर आपके लगातार कंप्टीशन में सफलता नहीं मिल पा रही है। आपके दोस्त, आपके रिश्तेदार आपको एक असफल इंसान का ठप्पा लगा चुके हैं लेकिन अपने जमाने में असफल माने गए इन सफल ब्यूरोक्रेट और कारोबारियों का इतिहास पढ़ लेंगे तो सफलता का रास्ता खुद दिख जाएगा।

stiv-jobs


12वीं में फेल हुए लेकिन आज सीनियर आईपीएस ऑफिसर

कहानी एक आईपीएस ऑफिसर की है जो 12वीं में फेल हुए लेकिन उसके बाद भी हार नहीं मानी। उन्होंने लगन और अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति को नहीं छोड़ा। मूल रूप से मध्यप्रदेश के मुरैना निवासी मनोज कुमार शर्मा की है जो मुंबई पुलिस में असिस्टेंट कमिश्नर के पर सेवारत हैं। मनोज शर्मा 12वीं फेल हो गए। उसवक्त किसी ने नहीं सोचा था कि उनकी यह असफलता की कहनी भविष्य के लिए एक सफल व्यक्ति की पटकथा लिख रही है। फेल होने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। अगले प्रयास में 12वीं पास की और उसके बाद ग्रेजुएशन क्लीयर कर यूपीएससी की तैयारी में जुट गए और चौथे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईपीएस बन गए। इन्होंने साबित किया कि मार्कशीट पर लिखते गए नंबर आपका जीवन नहीं लिख सकते। इनके जीवन में लिखी गई 12वीं फेल बुक एक नई प्रेरणा देती हैं।  

कॉलेज में मन नहीं लगा लेकिन दुनिया ने माना सफलता का लोहा

बात उस व्यक्तित्व की, जिसने मोबाइल टेक्नोलॉजी के रास्ते सारी दुनिया में अपनी सफलता के झंडे गाढ़े, लेकिन बेहद कम लोग जातने हैं कि उस व्यक्ति ने किस हिम्मत और जज्बे से काम लिया। बात हो रही है एप्पल कंपनी के मालिक रहे स्टीव जॉब्स की जो अब दुनिया में नहीं है लेकिन स्टीव ने जो कुछ जीवन में किया और जिसके जरिए दुनिया को नए तकनीकी युग में पहुंचा वो काबिले तारीफ है। कॉलेज इसलिए छोड़ दिया कि क्लास में शब्दों को ज्ञान मिलता है लेकिन प्रैक्टिकल ज्ञान में हम पीछे छोड़ जाते हैं। दोस्त के साथ मिलकर कंपनी शुरू की तो बाहर निकाल दिया गया लेकिन कभी यह सोचकर भगवान को नहीं कोसा की हे भगवान तुमने क्या किया? बल्कि स्टीव ने सोचा कि शायद ईश्वर ने उसके लिए नया रास्ता खोजा है और फिर से जुट गए।

अपनी ही कपंनी के जब से होना पड़ा स्टीव को बाहर

स्टीब जॉब्स ने अपनी सबसे अजीज दोस्त वोजनियाक के साथ मिलकर एक छोटे से गैराज से 1976 में एप्पल कंपनी की शुरूआत की। देखते ही देखते कंप्यूटर के क्षेत्र में 1980 तक यह जानी मानी कंपनी बन गई। एप्पल-2 तक चार हजार लोगों को रोजगार देने वाली और 2 बिलियन के शुद्ध मुनाफे की कंपनी बन गई। लेकिन एप्पल-3 के संस्करण में कंपनी को घाटा हुआ तो उसका ठिकरा स्टीब के सिर पर फोड़ा गया। 1985 में स्टीब को कंपनी से निकाल दिया गया लेकिन यहां से उनकी सफलता की नई कहानी की शुरूआत हुई। इसके बाद उन्होंने नेक्सट कंपनी बनाई जिसने 1992 में करीब 427 मिलियन में फिर से एप्पल को खरीद लिया। यह कहानी हमे बताती है कि कठिनाई कितनी भी बड़ी हो बस हिम्मत और हौंसला रखें।