अगर आप हमेशा रहना चाहते हैं फिट तो करें सिर्फ इतनी मात्रा में भोजन, नहीं तो हो जाएँगे बीमार

भोजन के पदार्थों की उत्तमता तथा शुद्धता के साथ इस बात का भी ध्यान रखना आवश्यक होता है कि उनको उचित मात्रा में ग्रहण किया जाए। शक्ति से अधिक मात्रा में खाई गई प्रत्येक चीज, चाहे वह कैसी भी उत्तम और लाभकारी क्यों न हो, हानि पहुँचाती है। 

Food
भोजन

इस संबंध में गरीब लोगों को तो विशेष कठिनाई नहीं होती, क्योंकि उनको प्रायः भरपेट रोटी मिलना भी एक समस्या होती है, पर मध्यम श्रेणी के तथा धनवान लोगों को इस विषय में अवश्य ध्यान रखना चाहिए। उन लोगों के यहाँ कई बार कोई न कोई भोज्य पदार्थ बनता रहता है और सदा नई-नई स्वादिष्ट चीजें बनाने की कोशिश की जाती है।

स्वाद के कारण अथवा दूसरे लोगों के आग्रह से वे प्राय: पेट की आवश्यकता से अधिक खा जाते हैं, जो स्वास्थ्य की निगाह से हानिकारक होता है। अनेक बार भरपेट भोजन कर लेने के पश्चात कोई फल, मिठाई या चटपटी चीज खास मित्रों के आग्रह से अधिक मात्रा में खा लेनी पड़ती है और बाद में पेट भारी होने की शिकायत की जाती है।

इस संबंध में भोजनविशेषज्ञों ने जांच- पड़ताल करके यह सिद्धांत निकाला है कि साधारण मनुष्य को अपने वजन के 160वें भाग के बराबर आहार एक दिन में ग्रहण करना चाहिए। पर इसमें कम मेहनत और ज्यादा मेहनत का काम करने वाले लोगों की दृष्टि से बहुत अंतर पड़ जाता है। इस प्रकार यह कहा गया है कि जो लोग बहुत कम शारीरिक परिश्रम करते हैं उनको 500 ग्राम, जो साधारण श्रम करते हैं, उनको 625 ग्राम और जिनको कठिन परिश्रम करना पड़ता है उनको 750 ग्राम तक आहार ग्रहण करना चाहिए। सबसे मुख्य बात यह है कि भोजन रुचि और शारीरिक परिस्थिति के अनुसार इतना ही किया जाए जिससे पेट में भारीपन का अनुभव न हो। 

हमारे पूर्वजों का यह कहना है कि बहुत बुद्धिमत्तापूर्ण था कि भोजन की थाली पर से तभी उठ जाएँ जब एक रोटी की भूख शेष रहे। इसके विपरीत जो लोग स्वाद या लालच वश एक रोटी ज्यादा खाने की लालसा रखते हैं, वे अपने पेट और स्वास्थ्य के साथ अन्याय करते हैं और फलस्वरूप बीमारी का दंड भोगते हैं।